छुपा के तस्वीर तेरी 

दिल के अगनात कोने में 

करू पूजा ;


लेके नाम तेरा 

अलख को जगाऊँ ;


संसार के मंडप में 

तुजे बैठा न पाया ,

न पहनाई कंठ माला 

ना कहा तुजे 

" मितवा " 

तो क्या हुआ ?


चुनकर फूल बकुल 

मन की बगिया से ,

चढावू तेरे पैर 

हर सुब्हा ,


करोगी कबूल ?


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 16 June 2020 /  Mumbai

“ This poem is written by ME – not by my AI generated Virtual Avatar at www.HemenParekh.ai "