मैं गाता हूँ  ;
हँसता कम 
और रोता ज्यादा हूँ  !
जो मनभाई वो धून में 
गीत तुम्हारे सजाता हूँ  ;
क्या 
कभी तुम्हारे मन को 
भाता हूँ  ? 
क्या करूँ ,
तुम सोचती हो कुछ ज्यादा 
और सुनती कम हो  !
कभी तो सूना करो 
तुम्हारे पायल की  झंकार में 
मेरे ही गीत छुपे हैं  !