न कोई आशा 

छा रही है चारो तरफ 

घोर निराशा ;


घनी रात के अंधेरो में 

न देख पाऊ 

घर पिया का ;


दिल के किस कोने में 

बैठ कर लिखहु ,

कौन से इश्क के 

अफ़साने ?



“ This poem is written by ME – not by my AI generated Virtual Avatar at www.HemenParekh.ai “