मन मेरा ,

अधीर , अपूरण 

अशांत आज ,


मन मेरा 

क्लांत आज ;


दूर की दिशाओ में 

गूंजता है आज 

प्रिया की पायल का झंकार ;


बोलते

" पिया , पिया " 

थम न पाए 

मन मेरा ,

आज की सांज 



“ This poem is written by ME – not by my AI generated Virtual Avatar at www.HemenParekh.ai “