मेरी जिंदगी पर
शायद
तुम्हारा कोई हक्क न रहा ,
मगर कैसे बताऊ की
( कोई पूछे भी तो ना  ? ),
मेरी मौत पर किसी और का
अधिकार नहीं  ;
जिस दिए में
तुम्हारे प्यार का तेल है
उसे तुम्ही बूज़ा पाओगी  ;
उजाले में जिसे न मिल शकी
उसे
अँधेरे में मिल जाओगी  ;
अफ़सोस ये नहीं के ज़माना
ना समज पाया मेरे अफसाना ,
गिला इस बात का है के
तुम्हारे आंसू ओ को भी
ना पि शका   !