और कुछ नहीं 

अब दे इजाजत ,


उठा सकू ना जिस ख्वाबो का भार 

शर से आहिस्ते उतारना चाहु , 



रख कर तेरे पैरों के पास 

वो गठरी

तेरे पायल को 

इक आखरी बार 

चूमना चाहूँ ,



भूला के भावी को ,

अतीत को

अलविदा कहना चाहूँ , 


लगा के ललाट में 

भभूत ,


गगन के गोख से गाना चाहूँ ,


अलख निरंजन 

अलख निरंजन 


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18 June 2020 / Mumbai

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