बर्बाद किस्से, बर्बाद कहानियां, बर्बाद लोग होते हैं,
मोहब्बत के कारनामे यहां, नए-नए रोज होते हैं।
और शब्दों को समझ पाना मेरे, तो ही पास आना
वरना वाह वाहिया तो मेरे, लफ्जों पे हर रोज होते हैं।।
और क्या कहते हो, की बातों से हम मुकर जाते हैं
शब्दों का क्या है, आज मेरे कल किसी और के होते हैं।
और जज्बातों को अल्फाजों में, लिख तो दिया था मैंने
और तुम समझ ना सके, तो बेवफा हम ही होते हैं।।


