Poetry 1 min read 609.3K reads

HASEEB


सजायी है हमारी दास्ता अपने होंठो परवो बेवफा बिक गयी कागज़ के नोटों पर

अभी सावन ना आया था ये बरसात कैसी हैमेरी आँखों का पानी था तेरे फूलो की नोको पर

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