सजायी है हमारी दास्ता अपने होंठो पर
वो बेवफा बिक गयी कागज़ के नोटों पर
अभी सावन ना आया था ये बरसात कैसी है
मेरी आँखों का पानी था तेरे फूलो की नोको पर