शीशे में ख़ुद का अक्स देख आज शर्म आयी है,
माँ ने जो अरसे पहले समझाया वो आज समझ आयी है...
आज आशुओं के बोझ को पलकों ने भी नही रोका है,
माँ को देख के आज दिल ने फिर से टोका है...
गर ना करता माँ की बातों को इग्नोर,
तो हक़ीक़त में आज मैं होता कुछ औऱ....✍HDX


शीशे में ख़ुद का अक्स देख आज शर्म आयी है,
माँ ने जो अरसे पहले समझाया वो आज समझ आयी है...
आज आशुओं के बोझ को पलकों ने भी नही रोका है,
माँ को देख के आज दिल ने फिर से टोका है...
गर ना करता माँ की बातों को इग्नोर,
तो हक़ीक़त में आज मैं होता कुछ औऱ....✍HDX