कई राते जागकर स्याह की हैतब कहीं जाकर आपने वाह की हैयूं ही नहीं आया है ये फन सुखन कामैने किसी से डूबकर मोहब्बत बेपनाह की है
कई राते जागकर स्याह की हैतब कहीं जाकर आपने वाह की है
यूं ही नहीं आया है ये फन सुखन कामैने किसी से डूबकर मोहब्बत बेपनाह की है