खोज रहे हो हमसे बेहतर ,
तो बोलो पैमाना क्या है?
प्रेम मापने का भी आखिर,
तुमने मानक माना क्या है?
चिंतित न हो, मिल जायेगा,
जग में मिथ्या प्यार बहुत है
मिल जायेंगे प्रेमी अगणित ,
हमसे अच्छे यार बहुत हैं
संभव है तुम पा भी जाओ,
हम से स्नेहिल, हम से बेहतर
और छुडा लो पीछा हमसे,
हमें दिक्भ्रमित मधुकर कहकर
किन्तु कहो,
क्या प्रेम यही है? ,
प्रेमी से बेहतर पा जाना?
कमियों का उपहास उडाना? ,
आभावों पर व्यंग बनाना?
नहीं सुमन,
ये प्रेम नहीं है ,
प्रेम मांगता है विकृतियाँ
असमंजस के अवसर में भी मूक,
किन्तु साझा स्वीकृतियां
ध्यान चयन में रखना प्रियतम,
जीवन प्रेम अनुसार चले है
बेहतर से व्यापार चले है,
समझौतों से प्यार चले है