वो जो पहले से ही कैद है अपने हाथो
एक बार और कैद हो भी जाएगा
तो क्या फर्क पड़ जाएगा!
वो व्यावसायिक थोड़ा अलग है
वो किसी और व्यावसायिक के क्षति में
अपना लाभ कभी नहीं ढूंढ पाएगा
वो व्यावसायिक जिसकी छत है उसकी पगड़ी
वो जो अपने पगड़ी के साथ माथे पे
संसार के हर जंजाल बांधता है
कर्जदारों से लिए गए कर्जो को शोध करने का हौंसला बांधता है
उस पगड़ी को कभी ना गिराने की सौगंध बांधता है
वो ब्याबसायिक जो अपने आंख के काले घेरे को श्रृंगार
और अपनी गुड़िया की मुस्कान को जमापूंजी मानता है
वो व्यावसायिक थोड़ा अलग है
बाज़ार में मिला नुकसान शायद माफ ना करे
मगर परिवार से मिला अंधकार को नींद में दबोच के सोता है
व्यवसाय इबादत है उसके लिए।
मगर इंसानियत को किसी भी मूल्य में बेच नहीं पाता
वो व्यावसायिक थोड़ा अलग है


