हम हार माने कैसे ?
हम ज़िद छोड़ें कैसे ?
अब जब ठान लिया ही है
तो हम पीछे हटें कैसे ?
पीछे हटकर, क्या कायर कहलाएं?
बुसदिलों के समान रण छोड़ जाएं ?
नहीं ये हम से नहीं होगा
युद्ध शुरू हुआ है
तो खत्म भी यहीं होगा
अब चाहे जीत हो या हार हो
मरण होगा
तो वीर बनकर ही होगा ।
~ हर्षित


