ज़िन्दगी, अब तो वापस आ जाओ

गलती हुई

बहुत कुछ कह दिया

माफी मांगता हूँ,

अपनी नाकामी तुम्हें मानी

हर दुख तुम्हें माना,

बचपन में खेलना सीखा था

आज तुम मेरे साथ खेल रही

माना कि रिश्ते नहीं निभा पाया

गंभीर होने की उम्र में हँसता रहा

पर तुम तो हमेशा साथ थी

तुम्ही तो थी ,

जिसने मुझे प्रेरणा दी,

दूसरों का रूप दिखाकर

मुझे इंसान होने की सीख दी

आज कुछ नही है मेरे पास

ना धन , ना मन , ना सहजन

अकेला हूँ

अब दौड़ में थक गया हूँ

झूठी शान नहीं चाहिए

साथ चाहिए तुम्हारा

उस नदी के ठहरे पानी में मुस्कराती हंसनी की तरह

देखना चाहता हूँ तुम्हें

ज़िन्दगी , अब तो वापस आ जाओ

माना ना तो फिक्र की तुम्हारी,

ना ही किसी से जिक्र किया

अपनी धुन में इतना मस्त

तुम्हारे हर सवाल को टालता रहा

हिम्मत ही नहीं हुई कभी

पर आज कह पा रहा हूँ

मुझे आज दूसरा जन्म दे दो

वादा है, इंसान हो कर दिखाऊंगा

मेहनत की स्याही से नई इबारत लिखूंगा

तुम्हारे साथ की गई यात्रा

तुम्हारा कर्ज

लोग तुमसे प्रेरणा लेंगे,

ज़िन्दगी हो तो ऐसी हो,

तो आ रही हो ना,

इंतजार उसी छोड़ी राह में कर रहा हूं,

हार जीत का तो पता नही,

पर मैं अब तुम्हें जीना चाहता हूँ।

- हर्षित कुशवाहा