"टूटता रिश्ता"

किसी कारणवश अधिक समय पश्चात जब बात करने का बहुत मन हो,किंतु आत्मसम्मान और अहंकार के मध्य वो है जो आगे बढ़ने से रोकता है। तब उस वो से उन तक की दूरी यादों में ही तय करने वाले याद बनकर रह जाते हैं। अब याद करने का नहीं बल्कि खूबसूरत याद को अपनी बात करने की शुरुआत का वक्त है। डर भी कहीं है, क्या होगा। पर जब सच्चे दिल की बातें एहसास बनकर आँसू कहते हैं, तब धड़कन न केवल सुनती है बल्कि उन यादों , उन बातों से अपनी कहानी भी बुनती है उस वो से उन तक के लिये पहल करना जरूरी है । पर पहल करने की पहेली है कि कौन ? बात करनी दोनों को है, पर आत्मसम्मान और अहंकार के मध्य वो भी तो है। और वो है लकीर जो दोनों ने रिश्ते के बीच में खींच रखी है। दोनों ही लकीर के दोनों तरफ होकर अपने अपने को महत्व दे रहे हैं। और लकीर कह रही हे, दोनों में से कोई तो आओ, उसे ही खत्म कर दो। इस तरह मिलोगे तो एक दूसरे से, प्यार को मरने मत दो, कद्र कर लो, खुशकिस्मत हो.......पर ...मन में क्या है दोनों के ,पता नहीं पर खामोशी ने शायद कहानी का अंत बयां कर दिया।

- हर्षित कुशवाहा