जादू देखना हो
शेरो- शायरी सुननी हो
रोटी खानी हो
रंग पहचानना हो,तो
आइए ,सभी आमंत्रित हैंं
सज चुका राजनीति का रंगमंच है
किरदारों का अभिनय शानदार
कब करूण कब हास्य
चुनौती है यह रहस्य
नये नये खेल हैं नाटक में
जीत छुपी है ताकत में
गीत - संगीत का क्या कहना
जैसे बाढ में नदी का बहना
दृश्यों में रोमांच है
टूटता सच का काँच है
परदे के पीछे से निर्देश है
मुखौटों के कई भेष हैं
कहने में सेवा -सेवा है
अर्थ में मेवा - मेवा है
राष्ट्र का महत्व प्रशंसनीय है
किंतु भ्रष्टाचार निंदनीय है
उम्मीद लोकतंत्र के पर्व से है
प्रश्न हर चेहरे के गर्व से है
जूझती भूख कच्चे रास्तों में मांगे पानी
सात समुद्र पार सी लगती राजधानी
तालियों का शोर कुछ ज़्यादा है
उठती आवाज पर कोई न कोई प्यादा है
गुमनामी ढोता क्रांति का लेखक सदमे में है
नई पटकथा में हस्ताक्षर किरदारों के हैं
नीति पर राज का मनोरंजन कर बने जो ज्ञानी हैं
सजग न होने की कीमत दर्शकों को ही चुकानी है।
- हर्षित कुशवाहा


