स्वदेश प्रेम मेंं बहते रक्त को भूलकर
दुश्मनों को भारतीय शौर्य दिखाकर
चौरासी दिन में दुर्गम कारगिल वापस लिया
ऋणी हैं उनके जो हैं देशभक्ति के दिवाकर
कुछ चेहरे हैं, कुछ चेहरों की कमी
जीत की खुशी है, आँखों में नमी
इक्कीसवीं सदी में इक्कीसवीं सालगिरह
स्मरण कराती राष्ट्रीय एकता की
- हर्षित कुशवाहा


