
अपनी आंखों में छोटे सपने लेकर चल पड़ा मजदूर है
अपने गांव से दूर किसी अंजान शहर में भटक रहा मजदूर है
हिम्मत इतनी की अंगारों पे चल रहा मजदूर है
लॉकडाउन में तड़प रहा मजदूर है
जो भी कमाता घर को भेज देता मजदुर है
खुद सुखी रोटी खाकर सो जाता मजदुर है
सच मे इज्जत का असली हक़दार मजदूर है
लॉकडाउन में तड़प रहा मजदूर है
अपने अपने घरों के ल
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