अम्बिया के बागों जैसी मुसकान देखीं है,
कड़ी धूप में भी तेरे पल्लू की छाव देखीं है,
मैंने तुझमें खुदा की अज़ान देखीं है,
तुझसे ही दुनियां की पहचान देखीं है,
क़दम दर क़दम मेरी तारीफ में उठी
तेरी आँखों की शान देखीं है,
मैंने मेरी हँसी में बसी
माँ कि जान देखीं है।