मै!

मै प्रभात हूँ

मै दीप्त हूँ

हाँ मै दीप्त हूँ,अभी प्रारंभ का

मै प्रगढ़ हूँ धीरता का

मै सरस हूँ संवेदनाओ का

और प्रखर हूँ उन्तेजनाओ का

यूँ बाह्रा मुझमे झाकोगे उलझ जाओगे

मै कुटिल हूँ और स्वार्थ भी मुझमे

मै जटिल हूँ और अनाविल भी मुझमे

मै उभयभाव हूँ

जो मुझे समझोगे तो उलझ जाओगे

मै आशुतोष हूँ खुद से संतोष हूँ

मै प्रभात हूँ और अभी उदय मे हूँ

बस इतना सा है परिचय मेरा

शायद! तुम समझ जाओगे

या फिर उलझ जाओगे



-- हर्ष सिन्हा