वक्त मिला है संभाल ले

हे पृथ्वी तो सुधारती स्वयं को वक्त मिला है सुधार ले,खूबसूरती है बेहद तुझमें वक्त मिला है निखार ले,क्या पता समझ आए ना इंसान में,इस वक्त मैं हीं तो खुद को संभाल ले ।।

क्या पता ना हो फिर ये समा,क्या पता ना हो फिर ऐसा आसमा,

हो सकता ना चले फिर ऐसी हवा,ना बहे गंगा में जल इस तरह ।।

हो के कुछ पल के लिए हमसे आजाद,तू भी अपने मौलिक अधिकारों को स्वीकार ले,

वक्त मिला है संभाल ले,

वक्त मिला है संभाल ले,

-हर्ष लखोटिया