चल रही तू
भीड़ मैं भी चल अकेला,
चल राही तू-चल राही तू,
अंधियारे में भी रोशनी बना,अब अपनी राह बना ही तू,
चल राही तू-चल राही तू,
आसमान करें इंतजार बाहें खोलें, अब खुदा को मिन्नतो का पैगाम भेजवा ही तू,
चल राही तू-चल राही तू ।।
अब तो हिम्मत की एक चिंगारी सीने में लगा ही तू,
चल राही तू-चल राही तू ।


