अभी तो रात बाकी है
देख लेता हूं दुनिया को अभी आंखों का प्रकाश बाकी है,धरती को देखा,तारों आकाश बाकी,थोड़ा और जी लेता हुं,अभी तो रात बाकी है,
कुछ लब्ज और कह लु,अभी थोड़ी बात बाकी है,थोड़ा और जी लेता हूं,अभी तो रात बाकी है,
अपने लिए तो की थी कई दफा,गैरों के लिए थोड़ी फरियाद बाकी है,थोड़ा और जी लेता हूं,अभी तो रात बाकी है,
कदम कदम चले थे,गिरे थे,उठे थे,बने थे,दुनिया के संग थोड़ा साथ बाकी है,थोड़ा और जी लेता हूं,अभी तो रात बाकी है,
कुछ कमियां बाकी जो सुधार लु,कुछ अहम बाकी जो उतार लु,कुछ बिगड़ी चीजें है सवार लु,अभी भी कुछ जीवन का सार बाकी है,थोड़ा और जी लेता हूं,रात बाकी है,
जीवन में है हम और कुछ जीवन की आस बाकी है,ये हवाएं जो बह रही उसमें हमारी भी कुछ सांस बाकी है,थोड़ा और जी लेता हूं,
अभी तो रात बाकी है।।अभी तो रात बाकी है।
-हर्ष लखोटिया


