पांच सी आ पी एफ के जवान हमारे शहीद हो गए
पुलमावा मे आंतकी हमले मे
देश को सदैव आप पर गर्व रहेगा जय हिंद
कुछ पंक्तियाँ वेदना में
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हे विधाता तुझसे पछता
क्यो जग में नित निरीह मरे ,दुष्ट मरता क्यो नही
हे रवि की रश्मियों बोलो
क्यो सिर्फ ग्रीष्म में ही तपती , दुष्टों पे तपती क्यो नही
बता विधाता बता आज
किस कर्म के करने से निरीह , सहता घात यू ही
धरा से नभ तक मानव है
हर जगह फैला मानव है , फिर मानवता फैलती क्यो नही
बता विधाता बता आज
त्रस्त मानव को बता , क्या सृष्टि चलेगी यु ही
विलुप्त है पशु पक्षियों की प्रजातियां
फिर ये अधर्मी कैसे शाश्वत, लगता इन्हें रोग क्यो नही
अर्जुन तुझसे पछता आज
हिंसा के गिरि खडे हैं, अधर्म के स्वर्ग अटल हैं
कहाँ हैं विधाता तु
कहाँ था ना "सृजामयहम", फिर जन्मता क्यों नहीं
