शांत रहता हुँ, जो चाहा वो पाया या नहीं
शांत रहता हुँ , जो था पास में बहा तो बहा सही
शांत रहता हुँ, रूठा हो कोई मेरी सीख पे भले कभी
कि एक विचार करके ये भी
बांध बांध देने से, नदियाँ बहना छोड नही देती
एकत्र पर्वत सा सब करने से , जीवन बीत जाता नहीं
देख परिस्थितिया विकल, मन में न हो प्रश्नों का कौतुहल
समय समक्ष आयेगा ,समय है हर प्रश्न का हल
शांत रहता हुँ, शांत रहता हुँ..
