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"स्वर्ग मेरा फिर से आबाद हो रहा है "(कविता) हाले कश्मीर

मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"स्वर्ग मेरा फिर से आबाद हो रहा है " (कविता) हाले कश्मीर 

चैन है, अमन है, 
 गुरबत भी जा रही है
हर ओर वादियों में फुर्सत सी आ रही है ।

वो मुफलिसी का आलम, वो दौर जा रहा है ,
उजड़े हुए चमन में,
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