"प्रेम के अक्षर न बदलना" 
(कविता)दोस्ती के नाम पैगाम's image
Poetry1 min read

"प्रेम के अक्षर न बदलना" (कविता)दोस्ती के नाम पैगाम

हरिशंकर सिंह सारांशहरिशंकर सिंह सारांश October 7, 2023
Share2 Bookmarks 64081 Reads3 Likes
मेरी लेखनी, मेरी कविता 
"प्रेम के अक्षर न बदलना"
(कविता) दोस्तों के नाम एक पैगाम  

कुछ भी तो नहीं इनके  बराबर; न बदलना।
ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना ।।

हालात में बदलाव बड़ी बात नहीं है,
 है बात बड़ी ,आप के तेवर न बदलना ।

ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना।।

फितरत भी बदल जाती है, बदले जो मुकद्दर,
 ऐसा है तो अच्छा है, मुकद्दर न बदलना।
  
ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना ।।

अनजाने वक्त के

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts