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मेरी लेखनी मेरी कविता 
नफरत के बीज न बोना
(कविता) अमन विशेषांक
 
युगों युगों से बनी हुई
वह परंँपरा ना खोना।
 नफरत के बीज न बोना। 
 साथ रहे हैं ,साथ रहेंगे
मिलकर सारे कार्य करेंगे।।
 नफरत के ठेकेदारों को तुम
 दिखला देना कोना
नफरत के बीज न होना।।

नफरत फैलाने वाले तो केवल
 नफरत ही फैलाते है

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