मेरी लेखनी मेरी कविता
मेरे मन को लुभाता है
(कविता)प्रकृति विशेषांक
मेरे मन को लुभाता है
सूरज की लाली
रंगों का मिश्रण
मन में समाता है
मेरे मन को लुभाता है।
नीले गगन में
वो चिड़ियों का मेला
वह तिरछी कतारें
वह हर पल का रेला
मन जीत जाता है
मेरे मन को लुभाता है।।
वह तारों की झिलमिल
वह जुगनूँ की चमचम
वह बूंँदों की टप टप
वह शांति का आलम
दिल में उतर जाता है ।
मेरे मन को लुभाता है ।।
हरिशंकर सिंह सारांश


