मेरी लेखनी ,मेरी कविता
मांँ जन्नत का फूल है। (कविता)

साया बनकर
साथ निभाती
 चोट न लगने देती
 पीड़ा अपने ऊपर लेती
 सदाँ सदाँ सुख देती ।।

मात वंँदना तुम करना
हम तुमको यही सिखाते
मांँ के चरण
सदा ही छुना
घर में आते जाते ।।

हरिशंकर सिंह सारांश