झुकजा एै आसमांँ (कविता)'s image
Poetry1 min read

झुकजा एै आसमांँ (कविता)

हरिशंकर सिंह सारांशहरिशंकर सिंह सारांश October 7, 2023
Share0 Bookmarks 48232 Reads1 Likes
मेरी लेखनी मेरी कविता 
झुक जा एै आसमांँ
(कविता)

झुक जा एै आसमांँ
 मुझे पैगाम लिखना है। 
समय की रेत पर
मुझको भी अपना
नाम लिखना है ।।

चली जो रेत की आंँधी
 उसे संँबल बनाना है ।
गिरे जो भाल वीरो का
उसे ताकत बनाना है।।
 चले थे बीर जिस भूमि
 उसी पर पैर रखना है।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts