जन्नत हमारी देखो
 पैगाम दे रही है ।
(कविता)पैगामे कश्मीर's image
Peace PoetryPoetry1 min read

जन्नत हमारी देखो पैगाम दे रही है । (कविता)पैगामे कश्मीर

हरिशंकर सिंह सारांशहरिशंकर सिंह सारांश February 7, 2022
Share1 Bookmarks 43346 Reads1 Likes
जन्नत हमारी देखो, पैगाम दे रही है ।
(कविता) पैगामेे कश्मीर 

जन्नत हमारी देखो
 पैगाम दे रही है

 छँट रहा है कोहरा,
 बादल भी छँट रहे हैं।
<

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts