मेरी लेखनी मेरी कविता 
हिसाब कौन पूछेगा?
( कविता) 

बादलों से बूंद का 
समुद्र से पानी का
 हिसाब कौन पूछेगा?

जिंदगी है एक किताब 
रोज खुलता है एक पन्ना
 पन्नोंं का हिसाब
जिंदगी से कौन पूछेगा?

जो पन्ने रहे गए
 जिंदगी से चिपके 
उन पन्नों का हिसाब
 किस्मत से कौन पूछेगा?

हरिशंकर सिंह सारांश