मेरी लेखनी मेरी कविता 
हम तेरे पंक में यूँ सिमट जाएंगे
 (कविता )

हम तेरी राह के बाजूए हमसफर
हम तेरे पंँक में यूँ सिमट जाएंगे।
तेरे जाने पै हम तो सिहर जाएंगे। 
तेरे आने से तेरी हंँसी की कसम 
तेरी बांकी अदाओं पै मर जाएंगे। 
हम तेरे पँँक में यूूँ सिमट जाएंगे ।।

 कल्पना के सयाने सफर की कसम
जिंदगी के सलीके भरम की कसम 
हम तेरी राह में फूल बिखराएंगे ।
हम तेरे पँँक में यूँ सिमट जाएंगे।।

खिड़कियों से कभी हमको देखा करो
तिरछी नजरों का जादू बिखेरा करो ।।
आमने सामने का फजल जो हुआ ,
हम तो नजरों में अपनी ही गिर जाएंगे 
हम तेरे पंक में यूँ सिमट जाएंगे ।।

हरिशंकर सिंह सारांश