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एै गगन के स्याह बादल तू मुझे इतना बता (कविता )

मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
एैै गगन के श्याह बादल तू मुझे इतना बता 
(कविता )

एै गगन के श्याह बादल
 तू मुझे इतना बता|
 दूर क्यों जाता है मुझसे
 क्या बता मेरी खता?

 चाह में उस मेघ के
आंँखें भी बोझिल हो रहीं।
 कलियांँ भी नन्हे वृक्ष की
दिन रात झुरमुट हो रहीं।।

 मेघ की चाहत उसे
 ढांढस बंधाती है।
 जगी जो प्यास जीवन में
 उसे आंँसू दिलाती है ।
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