चंँचल जी पवन
सर सर करती,
संदेश नया फैलाती ।
निज पथ
पर तू चलता जा बस,
हर मानव को सिखलाती ।
चंँचल सी पवन
सर सर करती ,
संदेश नया फैलाती।
हर दिवस नया नूतन तेरा
तू आगे बढ़ते रहना,
सब कुछ संभव है
जीवन में
तू अलग न इससे होना ।
ज्ञानी और अज्ञानी को
तू सबको राह दिखाती।
चंँचल सी पवन
सर सर करती
संदेश नया फैलाती ।
हरिशंकर सिंह सारांश


