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बटोही (एक छंद)


मेरी लेखनी ,मेरी कविता

घूमता क्यों इस कदर ,तू वक्त की पहचान करले।

जिंदगी है काम की ,तू जिंदगी से प्यार कर ले।

ए बटोही वक्त कीपहचान कर ले ।।

— हरिशंकर सिंह सारांश
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