Poetry 1 min read 784.9K reads

वो खिड़की...


वो खिड़की, वो मासूम चेहरा,वो मुस्कान याद आती हैक्यों आज़ भी ऐसा लगता हैजब गुजरता हूं उसकी गली से,वो बाहर आ जाती है

— हरीश @Harish_cso
Read more Earn more Learn more