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'सुनहरा कल'


जो कल तक थी, ज़िंदगीकभी रास नहीं आई

मगर सुनहरे कल की उम्मीद,मुझे हर रोज़ नज़र आई

आज़ भी सूरज की नूतन किरण,एक स्याह रात का अंत बनकर आई

— हरीश ( @Harish_cso
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