जो तुम्हें कड़वे लगे,उन्हें जुबां मत दो 'हरीश'किसी दिन लौट आते हैं,वक्त के पृष्ठ से टकराकर'शब्द' भी परावर्तित होते हैं- हरीश@Harish_cso१५/१२/२०२१
जो तुम्हें कड़वे लगे,उन्हें जुबां मत दो 'हरीश'किसी दिन लौट आते हैं,वक्त के पृष्ठ से टकराकर'शब्द' भी परावर्तित होते हैं
- हरीश@Harish_cso१५/१२/२०२१