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'मेरा संघर्ष '


'मेरा संघर्ष'"कभी ज़िंदगी,तो कभी दुनियारुलाती बहुत है

थकती नहीं,मेरी आंखों मेंपानी बहुत हैं

नित सींचता हूं,जड़ें सपनों कीगहरी बहुत है

नाकाम है मगरहारा नहीं, दिलज़िद्दी बहुत है"

— हरीश
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