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बेहद ज़रुरी है


"बेहद ज़रुरी हैं ज़िंदगी मेंमौसम पतझड़ का ऐ मेरे दोस्त

पहचानते कैसे अपनों कोगर सदा बहार रहती"

— हरीश @Harish_cso
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