"बेहद ज़रुरी हैं ज़िंदगी मेंमौसम पतझड़ का ऐ मेरे दोस्तपहचानते कैसे अपनों कोगर सदा बहार रहती"
"बेहद ज़रुरी हैं ज़िंदगी मेंमौसम पतझड़ का ऐ मेरे दोस्त
पहचानते कैसे अपनों कोगर सदा बहार रहती"