तुम जो समझो, मैं साफ हूं।


जिंदगी की नूर हो तुम

 हुस्न की देवी हो तुम

 यकीनन मेरी जिंदगी हो तुम

 पर इतना याद रखना

 मां के चरणों की धूल से

 ज्यादा कुछ नहीं हो तुम।


तुम परी हो मेरी 

मैं भी तो उसका लाल हूं

कैसे भूल जाऊं उनको 

प्यार करना सिखाया हमको।


और वैसे भी

कल जिसका कुछ पता नहीं

कैसे भुला दूं 

कल जिसको जिया है मैंने।


कसम से

 बेइंतहा मोहब्बत करता हूं तुझसे

 पर वात्सल्य का ऋणी पुत्र

 त्याग सकता है कुछ भी।


प्यार तो निश्चल निस्वार्थ होता है

 इसमें कोई शर्त हो नहीं सकती 

हर रिश्तों की अपनी अहमियत

किंतु परंतु या तुलना ठीक नहीं।



भविष्य का आधार भी

अतीत ही होता है प्रिय

 और मत भूलो 

इस जीवन चक्र में

 अतीत तुम भी बनोगी।


अंतिम बात यही प्रिय

मैं केवल तेरा हो नहीं सकता

अब तुम जो समझो 

मैं साफ हूं।


      हरिओम शंकर

      मदर्स डे,2020।