यूँ ही मंजिले नही मिलती,
बस सोच लेने से।
पर कुछ भी असंभव नही,
तेरे ठान लेने से।
मंजिल कहीं भी हो,
रास्तें मिल ही जातें हैं।
कुहासा रहे दो-चार दिन भले,
धूप तो खिल ही जाते हैं।
अपनी जिद पर अड़ा रह तूं ,
हिम्मत और हौसला रख।
आँधियाँ हो कितनी भी तेज भले,
बरगद तो वहीं रहता है।
माना कि रास्तें बहुत खराब है,
पर तुं चलता जा
क्योंकि जितना पिछे को तुम आओगे,
मंजिल उतनी ही आगे होगी।
संघर्ष से क्यों घबराना,
जब संघर्ष ही जीवन है।
कर लो अब संघर्ष से यारी,
यह दुनिया तुम्हारी है।
बस इतना सचेत रहना,
आत्मविश्वास ना कम हो पाए।
बोल लेने दो आज उसे,
कल तो तुम्हारा ही है।


