मेरी जिंदगी,
मेरी हकीकत,
सब तुम ही तो थी
पर काश !कोई समझ पाता।
क़सूर किसका था,
मेरा या तेरा,
ये भी तो नहीं पता
पर काश ! अब भी तो तुझे भुला पाता ।
साल दर साल
बीतता गया,
भूलने की लाख कोशिशे
करता रहा
पर अब भी कभी-कभी,
ना जाने कहाँ -कहाँ
बेखबर इस जहाँ से,
बस चलता जाता हूँ -2 ।
मुझे पता है
तड़पती तुम आज भी हो
पर काश ! तुम दिखा पाती ।
तेरे किस्मत में
शायद उसी का नाम था
पर काश ! मेरा ही नाम होता ।
मुझे पता है
कहीं नहीं हूँ
अब तेरी जिंदगी में ।
पर तेरी सलामती की दुआ
तो अब भी रोज करता हूँ ।
रब से मांग कर
तेरी दुनिया
मैं तुझसे दूर चला।
मेरा क्या है
,मैं तो जी ही लूंगा
तुझसे वादा जो किया ।
सचमुच !
मैं बहुत खुसनसीब था
कि मुझे तेरा प्यार मिला ।
लोग तो मीठी चाय नहीं पिते,
तुमने तो पूरी जीवन ही पी ली ।


