इश्क युं हीं बदनाम नहीं हुआ
आकर्षण भी इश्क हो गया
धन दौलत ही आधार हो गया
पल्लू पिछे घूमना मान हो गया
घर टूटना परिणाम हो गया।
अरे सच तो यह है कि
इश्क जैसा कुछ भी नहीं
ना इससे बढ़िया धन
ना इससे बड़ा तप
और ना इसके बिना जीवन।
दरअसल इश्क में
धैर्य और विश्वास चाहिए
समझना और समझाना चाहिए
त्याग और समर्पण चाहिए
मानसिक शक्ति चाहिए।
दिल और दिमाग का संतुलन चाहिए
सच और झूठ की समझ चाहिए
एक दूसरे के प्रति कसम चाहिए
जीवन की धारा को इश्क चाहिए
जीवन की धारा को इश्क चाहिए।
हरिओम शंकर।
दरभंगा,


