एक पक्षी प्रेमी के सामने, जब किसी पक्षी की मौत हो जाए,तब उसकी बेकाबू भावना और अपना मर्म व व्यक्त करते हुए,
वो मौत का मंज़र भी क्या अजीब था,
जब तू मेरे करीब था,
मै तेरे काम न आ सका,
मौत से ना तुझको बचा सका,
तेरे असहनीय दर्द देखकर भी चुप रहा,
मौत होती है कितनी वेवस कुछ ना कर सका,
क्या मौत भी सताया करती है,
दर्द से रुलाया करती है,
तेरी आखिरी वक्त में ना मै तुझको सहला सकता और ना ही तुझे हाथो में उठा सकता है,
तेरी मौत ही तेरे लिए सत्य था,
मेरा प्रेम भी असत्य था,

