तुझे क्या गजले सुनाऊं,
अपना दुःख कैसे बताऊं,
दिन के उजाले में भी शाम हो रहे है,
बिन गलती भी बदनाम हो रहे,
अब ना आंसू छुपाए जा रहे है,
बिन मन के ना कुछ, गुन गुनाए जा रहे है,
शौख भी बड़ी भारी थी,
जितने की भी जिम्मेदारी थी,
फिर भी हार गया हूं,
अब तो कुछ ना बोल रहा हु,
केवल रो रहा हूं,
किस्मत ही सताए जा रहा है,
हरपल रुलाए जा रहा है,
Hariom pathak
