मेरी उम्र जो है सो है

मै मौत से नहीं डरता

आए तो आज आए

कल किसने देखा।

(मौत जिंदगी से बड़ी कैसी हो सकती है)

मौत का क्या है ?पल दो पल की!

जिंदगी सिलसिला ,ना आज की ना कल की!

रास्ता रोक जब वो खड़ी होगी

तब भी ना वो जिंदगी से बड़ी होगी।

पर वहीं कुछ ऐसी बात भी है

दर्द अपने परायों के तो कुछ खाख़ भी है।

मोह जगत का छूटेगा

तब भाग्य से पीछा छूटेगा

ब्रह्म वाक्य अगर है वो अंततः एक दिन आयेगी

तो आजाए टकराए मुझसे

कई बार गुलाटी खाएगी।

ना मै डरा हूं, ना मै डरूंगा

दे पलटवार करके उसपे मै

दूजा जन्म लेके मरूंगा।

आती है तो आजाये,मर्जी जितनी बार वो मुझसे टकराए

पा कई जीवनों की टक्कर वो मौत की मौत आजाएगी।

मेरी उम्र जो है सो है

मै मौत से नहीं डरता

आती है तो आज आ जाए

कल किसने देखा है।

~गिरी