बहुत देर तक प्यासा ही रहा,

एक पक्षी था उड़ नहीं पाया,

हताशा मन में, मजबूर हुआ,

अपनो की ख़ातिर दूर हुआ ।।

तलाशता अपना आशियाना,

अब घर नहीं उसका ठिकाना ।।


सोचा अब तक कर नहीं पाया,

हालात से अपने लड़ नहीं पाया ।।


ढूँढ़ता अपनी खोई ज़मीं, 

खोया आसमाँ,

कुछ बचा नहीं,

लुट चुका है सारा जहाँ ??


अब क्या कुछ अच्छा हो पाएगा...??

जो देखा सपना सच्चा हो पाएगा...??



"""""अब क्या कोई अपनाएगा 

ख़्वाब उस का सजाएगा

कौन है यहाँ ऐसा जो 

मोहब्बत उस पे लुटाएगा """""


आगे•••


"""""इक उम्मीद सदा रहती है

जिस ओर वफ़ा रहती है

टूटी रस्सी तो क्या हुआ

साथ मिरे दुआ रहती है """""


और•••


""""""याद रखो सच्चाई काम आती है

की हुयी अच्छाई काम आती है

बस हौसला रखना मुश्किलों में

"माँ" की परछाई काम आती है """"""


सोचो•••


""""""इक ख़्वाब टुटने से क्या होगा

यूँही मायूस बैठने से क्या होगा

कुछ पाना है तो कोशिश करो

किसी को कोसने से क्या होगा """"""


ऐसा भी हुआ/होता है•••


********

""""""लोग भी देख कर उसे 

रस्ते बदल गए,

अपनी प्यास की ख़ातिर 

आगे बढ़ गए ।। """"""


""""""किसी की फ़िक्र कहाँ 

बुनते अपना आशियाना,

दूसरों का 'घर' उजड़ते 

अब देखे सारा ज़माना ।। """""""


"""""लोगों की ख़ुदगर्ज़ी ने 

कितनों पर ज़ुल्म किया,

कुछ घर नहीं पहुँचे और

नौ दिन सफ़र किया ।। """""""

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~ #हनीफ़_शिकोहाबादी ✍️


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